बवासीर के इलाज के घरेलु नुस्खे



बवासीर होने पर मलद्वार के भीतर और बाहर की नशें फूल जाती है । त्वचा सख्त एवं संकुचित होकर मस्से पैदा हो जाते हैं,जो कभी मलद्वार के अंदर तथा कभी बाहर होते हैं। इसमें खुजली वेदना ,तनाव,और जलन होती है ।मस्सों से खून निकलने पर 'खुनी बवासीर' और खून न निकलने पर 'बादी बवासीर'कहा जाता है । घी तेल की चिकनी चीजे ,मसालेदार भोजन,शराब के सेवन ,पेट में वायु संचय ,यकृत की खराबी,गर्भावस्था में कसकर या कैसे वस्त्र पहनने आदि कारणों से इस रोग की उत्पत्ति होती है।
बवासीर के इलाज के लिए लुक़मानी नुस्खे -

3 माशा सफ़ेद मोम को 1 तोला तिल के तेल में गलाकर 3 तोला गाय का ताजा मक्खन मिलाएं । फिर मोम की छाल 1 माशा ,बकाइन की छाल 1 माशा बकाइन के बीज की गिरी ,नीम के बीज की गिरी 1 माशा ,रसवत 1 माशा ,गुग्गल 1.50 माशा, सफ़ेद काशगरी 1 माशा और कपूर 1 माशा -सबको कूट-छान कर उसमें मिलाकर मरहम बनायें। बवासीर के मस्सों में वेदना और दाह होने पर इस मरहम को लगाने से तत्काल आराम हो जाता है।

सरसो का तेल एवं छागवसा-प्रत्येक 5 तोला,शुद्ध मोम 1 तोला ,अहिफेन 6 रत्ती तथा माजू 2 नग लें ।पहले शुष्क द्रव्यों को पीसकर रखें । फिर सरसों के तेल मोम और बकरी चर्बी 1 तोला मिलाकर गर्म करें ।इसके बाद पिसे द्रव्यों को इसमें मिलाकर मरहम तैयार करें ।इस मरहम को मस्सों पर लगाने से ठंढक पड़ जाती है कुछ दिनों के प्रयोग से मस्से सूख जाते हैं।

नीमकौली की गिरी ,रक्त गुग्गुल ,बकाइन के बीज की गिरी ,पीत रसवत,सूरजमुखी के फूल ,कलमी तल, पिली हरड़ का छिलका ,काली हरड़, काबुली हरड़, गुलाब के फूल ,सोंठ, गंदना के बीज-प्रत्येक 2 तोला लें।इनको बारीक पीसकर हरी मूली के पत्तों के रस और हरे ककरौंदा की पत्री के रस में तीन दिन आलोडन करके रीठे के बराबर गोलियांन बनाकर छाया में सुखा ले रोज रात में सोते समय एक गोली ताजा पानी से खाएं।यह हर प्रकार के बवासीर का शमन करती है।

नीम के बीज की गिरी बकाइन के बीज की गिरी,गंदना के बीज,रस वत, मुकल अरजक(रक्त गुग्गुल) और गेरू -प्रत्येक 2 तोला लेकर पहले गंदना के थोड़े से रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाये ।बादी बवासीर में दिन में दोनों वक़्त एक-एक गोली और खूनी बवासीर में दो गोली रात में ताजे पानी के साथ सेवन करे  ।इनके निरंतर उपयोग से यह रोग गायब हो जाता है।

नौसादर 5 रत्ती ,चीना ,सुन्दरूस और कुक्कुटांडत्वक-प्रत्येक 5 माशा लें सबको कूट छानकर ,पानी का छिटा देकर छोटी-छोटी गोलियां बना ले । 4-6 गोली रोज पानी के साथ सेवन करें। इससे बवासीर के रोग में अराम हो जाता है।

सफ़ेद मोम ,यशद भस्म,रसवत -प्रत्येक 1 तोला ,खतमी के फूल ,मुकल अरजक-प्रत्येक 2 तोला ,जावशीर ,सोंठ-प्रत्येक 5 तोला 10 माशा गुलरोगन 5 तोला और तिल का तेल 7 तोला लें। पहले तेलों को अग्नि पर रखकर खतमी के फूल और अरजक कूटकर डाल दें ,फिर शेष द्रव्यों को वैसे ही डाल दें और मिलाकर उतार लें बवासीर के मस्सों पर इसका लेप करके भाँग के पत्तों की टिकियाँ बांधकर लंगोट कस लें।इससे मस्सों में होने वाली वेदना शांत हो जाती है।
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