अधिक मात्रा में श्वेतसार खाने ,वंशगत दोष ,विशेष चिन्तन,श्वास-कास ,यकृत, मस्तिष्कऔर मेरुमज्जा में चोट लगने ,मलेरिया आदि होने मधुमेह (डायबिटीज) रोग की उत्पत्ति के कारण माने जाते हैं।कब्जियत एवं बहुत अधिक प्यास इसके प्रधान लक्षण हैं। इसमें इसमें शरीर धीरे धीरे कमजोर होता चला जाता है।
लुक़मानी नुस्खे
कासनी 4 तोला ,कुलफा 10 तोला ,छोटी इलायची ,बंसलोचन ,सत शिलाजीत ,गुडूची सत्व ,कपूर कुनैन -प्रत्येक 2 माशा सूखा मकोय ,छोटा गोखरू ,बबूल का कच्चा फूल, बबूल की जड़, बबूल की छाल ,बबूल का गोंद,- प्रत्येक 1 तोला ,जलाकर राख किये गए बबूल के कांटे 1 तोला ,जामुन के बीज की गिरी 2 तोला तथा ताज खुरुस 4 नग लें। इन सबको परस्पर मिलाकर ,कूट-छानकर चूर्ण बनाये । रोज 3 माशा यह चूर्ण अर्क नीलोफर ,अर्क वेदसादा और अर्क गावजबान -प्रत्येक 3 तोला के साथ सेवन करें ।यह मधुमेह की अनिमावस्था के लिए उत्कृष्ठ औषधि है।
फौलाद भस्म 2 माशा एवं अहिफेन 1 माशा को बारीक पीसकर चूर्ण बनाये।इसमें जामुन की गुठली का कपड़छन चूर्ण 14 माशा मिला दे। 1 माशा से 2 माशा तक यह चूर्ण 12 तोला अर्क गावजबान के साथ सेवन करें।यह मधुमेह के लिए लाभदायक है।
बंसलोचन ,हब्ब काकनाज ,पोस्तदाना ,मुलेठी का सत, गोंद कतीरा , दंमुल अख्वैन, गिल अरमनी,गिल मख्तूम -प्रत्येक 2 तोला ,गेहूं का सत, कद्दू के बीज की गिरी ,कुलफा के बीज -प्रत्येक एक तोला लें।इन सबको अलग अलग कूट छानकर मिला लें।यह चूर्ण जितना हो ,उतने ही प्रमाड़ में सफ़ेद खांड मिलाएं। 7 माशा यह चूर्ण 10 तोला दही के तोड़ के साथ सुबह शाम खली पेट खाये ।यह चूर्ण मधुमेह में गुड़कारी तथा मुर्दों को बल देने वाला है।
जहरमोहरा खताई, नीला बंसलोचन ,शुद्ध पुरानी ईंट -प्रत्येक एक तोला, कपूर 6 माशा ,जुफ्त बलूत 7 दाना ,कहरूआ शमई, गोंद् बबूल- प्रत्येक 1 तोला और पोस्त मुसल्लम 4 नग लें। इन्हें महीन पीसकर चूर्ण बनाये । 9 माशा यह चूर्ण 12 तोला अर्क गावजबान के साथ सेवन करें। यह गुर्दों के उष्ण प्रकृति विकार जन्य मधुमेह में परमगुड़कारी है।